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टीएसएस लॉक ओडियो एक्सपीरियंस। वंदे मातरम भारत माता की जय।

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बताया बच्चों एक और फेस्टिवल है इंडिया का प्रैक्टिस सिक्स्थ जनवरी को। उस दिन हमारा रिपब्लिक डे होता है यानि कि गणतंत्र दिवस और उसी के बारे में।

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आज हम चुलबुली टेल्स पर इस सुनीता रानी से एक कहानी सुनाने वाले तैयार हो इस पर हम सब एक साथ वापस से बोलेंगे।

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भारत माता की जय। गणतंत्र दिवस का मतलब होता है सारी रिलीजन और कास्ट।

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इंडिया में बहुत सारे रिलीजन हैं और बहुत सारी कास्ट है उन सबको कोई मानना और उनको सेम ट्रीटमेंट देता।

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इस साल ये हमारा सेवन 30 सेकेंड। मतलब 72 वां रिपब्लिक डे है। आज के दिन न्यू दिल्ली में हमारे प्राइम मिनिस्टर फ्लैग हाईस्पीड करते हैं। हमारे देश का तिरंगा झंडा फहराते हैं। परेड होती है और हम सब नाश्ता महानतम गाते हैं। इसके अलावा पार्टी सिक्स जनवरी को इस परेड में नैशनल ब्रेवरी अवॉर्ड यानी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के सारे बच्चे हाथी पर बैठकर इस परेड में हिस्सा लेते हैं। अब आप पूछोगे की नेशनल ब्रेवरी अवॉर्ड्स क्या होते हैं दादी पता है। इसका भी एक बहुत रोमांचक किस्सा तो हुआ ही हूं बहुत साल पहले ये और नाइन टीन फिफ्टी समवन मी। उस समय के हमारे प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू इंदिरा गांधी और भी कई हमारे नेता रामलीला मैदान में रामलीला देखने गए।

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सब बैठ की रामलीला देख रहे थे और उस समय वहां पे जो मैदान था वहां पर सबका ध्यान रखने के लिए स्काउट के कई वॉलेंटियर्स आए हुए थे। छोटे बच्चे जो स्काउट में होते हैं वो वापस वॉलंटियर का काम कर रहे थे। अचानक से वहां के टेंट में आग लग गई और सारी बड़ी लोग और भी जो लोग वहां पे देख रहे थे सब घबरा गए इधर उधर भागने लगी। इतनी तेज उल्टी शुरू हो गई थी। तभी वहां पर एक 14 साल का लड़का हरीश जो वहां पर वॉलिंटियर की ड्यूटी निभा रहा था। वो फटाफट से एक ऊंचे खंबे पर चढ़ गया और जल्दी से उसने अपने जेब में से स्काउट का चाकू निकाला और बिजली के तार को काट डाला क्योंकि वो तार जिधर से आग फैल रही थी उस तरफ जा रहा था और अगर उस तार से आग और ज्यादा फैलने का डर था। इस सब का में हरीश के दोनों हाथ जल गए। पर उसने बेटी कोई परवाह नहीं की और फटाफट अपना काम पूरा करके नीचे उतरा।

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पंडित नेहरू ने उसको देखा कि कैसे एक छोटी सी लड़की ने उस समय सूझ बूझ से और हिम्मत से सबकी जान बचाई। और नेहरूजी इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा कि हम और ऑल इंडिया लेवल पर ऐसे बहादुर बच्चों को हम आनर करेंगे उनका सम्मान करेंगे तो इस तरह यह नैशनल ब्रेवरी अवॉर्ड की शुरुआत हुई तो सबसे पहला वोट किसको मिला।

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बिल्कुल सही। हरीश चंद्र मेहरा को सबसे पहला नैशनल ब्रेवरी अवॉर्ड मिला और उसके बाद से अब तक भारतीय बाल कल्याण परिषद जो कि इस अवॉर्ड के लिए बच्चों को चुनता है को महान नहीं नाइन हंड्रेड से ज्यादा बच्चों को अब तक इनाम दे चुके हैं। इसमें लड़के भी हैं लड़कियां भी हैं छोटे भी हैं और थोड़े बड़े भी हैं।

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एक छोटी सी लड़की की और कहानी मैं आपको सुनाती। उम्र अभी छोटी और का दिल भी छोटा वो थीः ओडीसा की सात साल की ममता दलाई।

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इसको यह वोट क्यों मिला। पता है आपको वो अपनी बहन के साथ बड़ी बहन के साथ नदी के किनारे कुछ काम के लिए गई थी। उन गांवों में तो नदी होती है पर बच्चे आराम से उधर जाती है पर उस दिन वहां पर नदी के पास जो दलदल था जब कीचड़ था वहां से एक मगरमच्छ झट से बाहर निकला और ममता की बहन का हाथ उसे अपने मुंह में दबा लिया।

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कितनी जोर से उसको पेन हुआ होगा ना। ममता की बहन जोर से चिल्लाई। ममता ने झट से भाग के वहां जाकर अपनी बहन का दूसरा हाथ पकड़ लिया और चोर से खींचने लगे। क्योंकि वह समझ गई थी कि अगर इसने अपनी बहन को नहीं पकड़ा तो मगरमच्छ उसको खींचकर अंदर ले जाएगा। उसकी बहन के हाथ में से खून भी निकल रहा था। ममता तो बहुत डर भी गई थी। पर उसने पेट कोल हिम्मत नहीं हारी और चोर चोर से चिल्लाने लगी बचाओ बचाओ मगरमच्छ से बचाओ बचाओ मगर मच भाग चप्पल जब मेरी बहन को छोड़ दो छोड़ दो। वो जोर जोर से चिल्लाने लगी और अपनी बहन का हाथ उस दिन से कोई नहीं छोड़ा। मगरमच्छ ने बहुत हिम्मत दिखाई पर ममता की हिम्मत उससे भी ज्यादा थी और फिर मगरमच्छों ने अंत में हाथ छोड़ दिया और वहां से भाग गया और ममता ने झट से अपनी बहन को पानी में से बाहर खींचा और घर तक ले गई। वह फेटा नाम का इलाज किया और वो ठीक हो गई। तो थाना ये बहुत बहादुरी का काम और ममता को टू थाउजेंड सेवन टीन में ही इस नैशनल ब्रेवरी अवॉर्ड से उसको ओनर किया गया।

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ममता बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हैं और पता है ये कैसे मुमकिन हो पाएगा क्योंकि भारत सरकार इन सारे बच्चों को जिनको नैशनल अवॉर्ड मिलता है उनकी पढ़ाई का पूरा खर्चा सरकार उठाती।

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तो एक और छोटी सी कहानी हो चली है नई पौध इंस्पिरेशन। एकॉर्ड लड़का है। जब 10 साल का था उसे यह अवार्ड मिला और यह अवार्ड क्यों मिला पता है। क्या किया तो उस दिन वह अपनी स्कूल से घर जा रहा था और जाते जाते उसने देखा रास्ते में एक तालाब के पास में बच्चा खेल रहा था और उसके देखते देखते वह बच्चा तालाब में गिर पड़ा और वहां पर कोई भी तो संभालने के लिए पृथ्वी सिंह ने जल्दी से अपना स्कूल का बैग एक साइड में फेंका और भाग कर वो भी तालाब में कूद पड़ा। छोटा ही तो था इतना अच्छा उसको तैरना नहीं आता था पर उसके दिमाग में तो सिर्फ एक ही बात थी कि कैसे भी करके मुझे उस छोटे बेबी को बचाना है। प्रफेसर में जल्दी जल्दी जल्दी पानी में जाके उस बेटे का हाथ पकड़ा और उसको वापस किनारे की तरफ खींचने लगा और खींचते खींचते वो चिल्ला रहा था हमें कोई बचाओ हम पानी में डूब रहे हैं। ये बेबी भी पानी में डूब रहा है और फिर वहां पर जो आसपास जो लोग इधर उधर जा रहे थे उन्होंने उसकी आवाज सुनी और झट से सब तालाब के पास आ गए और उन दोनों बच्चों को पानी में से बाहर निकाला और उन्हें डॉक्टर को दिखा कर और वो दोनों एकदम ठीक होती तो पृथ्वी सिंह ने एकदम तुरंत जो डिसीजन लेक के पानी में कूदा और उस छोटे बच्चे को उसने बचा लिया। तो देखा ऐसी ही बहुत सारी कहानियां हैं जिसमें छोटे छोटे बच्चों ने बहुत हिम्मत और अपना प्रेजेंस ऑफ माइंड दिखा कर दूसरों की मदद भी की और एक हिम्मत भरा काम भी किया। तो हैं न ये कहानियां बहुत बहुत उत्साह देने वाली बहुत पहले इंस्पिरेशन

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है। आज हमें भी मोटिवेट करती हैं कि हम दूसरों की मदद करें। प्रेजेंस ऑफ माइंड रखें आप कभी भी हिम्मत पाएं। एक बार हम सब वापस बुलाएंगे।

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वंदे मातरम भारत माता की जय तो ये थी हमारी आज की कहानी और हम जल्दी एक और नई कहानी आपको सुनाने आएंगे तो हमारे साथ जुड़ते रहने की और नई कहानियां सुनते रहने की सूचना आपको मिलती रहेगी। ईपी ला मीडिया वेबसाइट पर या आपके फेवरिट पॉडकास्ट में आप जैसे कि जियो सावन एप्पल पार्टी का स्टोर्स पार्टी फाइव पर तो अपने फ्रेंड्स को भी बताना ना भूलें और हमारी कहानियां चुलबुली स्टेज पर सुनती रही।